संगीतमय मधुराष्टकं

नानकदुखिया पद्मपुराण में भगवान् कहते हैं, हे नारद! ना तो मैं वैकुण्ठ में रहता हूँ और ना ही योगियों के हृदय में। मैं तो वहीं रहता हूँ जहाँ मेरे भक्त मेरा कीर्तन करते हैं।प्रस्तुत है, मधुराष्टकं का संगीतमय रूप। इसे मधुर गायक येसुदासजी ने गाया है।Madhurashtakam.mp3... [पूरी पोस्ट]
writer Nanak
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[27 Aug 2009 05:43 AM]

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