गोपीगीत

नानकदुखिया श्रीमदभागवतम भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरुप है। इसीलिए इसके बारह स्कंध उनकी देह के बारह अंग के समान हैं। उनमें से दसवां स्कंध इस देह रुपी महापुराण का हृदय है। इस स्कंध के पाँच अध्याय देह के पञ्च तत्त्व हैं और इन पाँच तत्त्वों में गोपी गीत सबसे... [पूरी पोस्ट]
writer Nanak

bhaktiprem

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[24 Aug 2009 05:38 AM]

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