गोविन्द दामोदर माधवेति
ना मैं वैकुण्ठ में रहता हूँ और ना मैं योगियों के हृदय में बसता हूँ। हे नारद! जहाँ मेरे भक्त मेरा कीर्तन करते हैं, मैं वहीं रहता हूँ।...
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Nanak
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[08 Sep 2009 05:07 AM]



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