नन्द-नंदनम
करो मन नन्द नंदन को ध्यान। यह अवसर तोहे फिर ना मिलेगो, मेरो कहो अब मान॥ घूँगर वाली अलकें उसपर, कुंडल झलकत कान।नारायण अलसाने नयना, झूमत रूप निधान॥...
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Nanak
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[14 Sep 2009 03:11 AM]



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