मैली चादर...........
मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँहे पावन परमेश्वर मेरे मन ही मन शरमाऊँ तुमने मुझको जग में भेजा निर्मल देके कायाआकर के संसार मैं मैंने इसको दाग लगाया जनम जनम की मैली चादर कैसे दाग छुडाऊँनिर्मल वाणी पाकर तुझसे नाम ना तेरा गायानयन मूंदकर हे परमेश्वर...
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Nanak
भक्त टेर
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[16 Sep 2009 05:16 AM]



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