जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए.....

नानकदुखिया जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन कोमिल जाये तरुवर कि छायाऐसा ही सुख मेरे मन को मिला हैमैं जबसे शरण तेरी आया, मेरे रामभटका हुआ मेरा मन था कोईमिल ना रहा था सहारालहरों से लड़ती हुई नाव कोजैसे मिल ना रहा हो किनाराउस लड़खड़ाती हुई नाव को जोकिसी ने किनारा... [पूरी पोस्ट]
writer Nanak

करुनामय

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[22 Sep 2009 01:21 AM]

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