जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए.....
जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन कोमिल जाये तरुवर कि छायाऐसा ही सुख मेरे मन को मिला हैमैं जबसे शरण तेरी आया, मेरे रामभटका हुआ मेरा मन था कोईमिल ना रहा था सहारालहरों से लड़ती हुई नाव कोजैसे मिल ना रहा हो किनाराउस लड़खड़ाती हुई नाव को जोकिसी ने किनारा...
[पूरी पोस्ट]
Nanak
करुनामय
12
0
0
0
0
[22 Sep 2009 01:21 AM]



Shuffle








