मैं चुप हूँ..

अपूर्ण मैं चुप हूँबोलता था बहुत ,कभी कभी तोबहुत से भी थोडा ज्यादा,लेकिन अब मैं चुप हूँ |जब बोलता थातो सब कुछ बोल देता था,अब चुप हूँतो बस टटोलता हूँ,टटोलता हूँकुछ खुद में ,कुछ दूसरों में |ज्यादा बोलना ही चुप कर गया एक दिनमहफिलों कि शान था कभीऔरलोगों कि हंसी की... [पूरी पोस्ट]
writer निपुण पाण्डेय
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[11 Aug 2009 11:33 AM]

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