पांडे बैठे कविता लिखने.....
थोडा हास्य लिखने का प्रयास किया | खुद पे ही लिखी है कविता | कुछ मित्रों ने मुझसे ऐसा बोला तो वही लिख पड़ा .....पांडे बैठे कविता लिखनेबड़ी बड़ी कर देते बातेंकोई समझे, कोई न समझेसबसे वाह वाह मांगत फिरते |यार दोस्त सब कहने लागेअब तो पांडे गयो पगलाय,भरी...
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निपुण पाण्डेय
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[15 Aug 2009 14:01 PM]



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