मुस्कुराता तूं चला जा

रज़िया मिर्ज़ा आदमी है, आदमी से मिल मिलाता तू चलाजा। गीत कोइ प्यार के बस गुनगुनाता तू चलाजा। गर तुझे अँधियारा राहों में मिले तो याद रख़, हर जगह दीपक उजाले के जलाता तू चलाजा। जो तुझे चूभ जायें काँटे, राह में हो बेखबर, अपने हाथों से हटा कर, गुल बिछाता तू चलाजा। सामने तेरे... [पूरी पोस्ट]
writer रज़िया "राज़"
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[18 Aug 2009 01:57 AM]

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