....जब वो गाती है तब....
झुमती गाती और गुनगुनाती गज़ल,गीत कोइ सुहाने सुनाती गज़ल। ज़िंदगी से हमें है मिलाती गज़ल, उसके अशआर में एक इनाम है,उसके हर शेर में एक पैगाम है। सबको हर मोड पे ले के जाती गज़ल। उसको ख़िलवत मिले या मिले अंजुमन। उसको ख़िरमन मिले या मिले फ़िर चमन, वो बहारों को फ़िर है...
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रज़िया "राज़"
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[26 Aug 2009 11:54 AM]



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