.....वक़्त ने साथ छोडा हमारा तो....

रज़िया मिर्ज़ा वक़्त ने साथ छोड़ा हमारा जो था, हाय तेरा, तड़पना मुझे याद है। मुंह छिपाकर तेरा मेरी आगोश में, हाय कैसा बिलख़ना मुझे याद है।…हॉ मुझे याद है। प्यार की वादीओ में गुज़ारे जो पल, कैसे दिल से ओ साथी भूला पायेंगे? जिन लकीरों पे कस्मे जो खाइ थीं कल, आज हम वो लकीरें... [पूरी पोस्ट]
writer रज़िया "राज़"
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[03 Sep 2009 07:11 AM]

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