......उसे तलाश करो....

रज़िया मिर्ज़ा सफर में ख़ो गई मंज़िल,उसे तलाश करो।.किनारे छूटा है साहिल, उसे तलाश करो।.था अपना साया भी इस वक़्त साथ छोड़ गया।कहॉ वो हो गया ओझल उसे तलाश करो।ना ही ज़ख़म,ना तो है खून फिर भी मार गया।कहॉ छुपा है वो कातिल, उसे तलाश करो।भूला चला है वक़्त जिन्दगी के लम्हों को।मगर... [पूरी पोस्ट]
writer रज़िया "राज़"
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[07 Sep 2009 06:08 AM]

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