जब तुम नहीं थी...

मेरी डायरी के पन्ने... आज सुबह जब खुली मेरी आंख...तो तुम नहीं थी...नहीं मिला बिस्तर के सिरहाने रखा...वो चाय का कप...कसमसा कर रह गया मेरा हाथ...जाने क्यूं तुम नहीं थी...उनींदी आंखों को मसलती रह गई ...तेरी जुल्फों को तलाशती उंगलियां...जब बिस्तर को सहेजते वक्त भी नहीं मिला... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त वशिष्ठ
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[26 Aug 2009 01:20 AM]

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