चैन की सांस ...

मेरी डायरी के पन्ने... शाम को जब पापा ऑफिस से वापस आए...हाथ से टिफिन लेने मैं बढ़ा...कि अचानक उन्होंने ...ज़ोर से छींक दिया...हाथ बढ़ते-बढ़ते रुक गए...कदम जैसे वहीं थम गए...मैं किसी बहाने से...वापस कमरे में आकर बैठ गया...पापा वहां आए...मेरी आंखों में तैरते संशय को...शायद वो... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त वशिष्ठ
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[27 Aug 2009 03:26 AM]

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