मेरे हमदम
मिल नहीं सकते कभी नदिया के दो तीरलहरों को है मोहब्बतसाहिल से बहुतमगर रह जाता है साहिल परउनके आंसुओं का नीरडूबते सूरज की भीजाने क्या है आरज़ूआभास देता है समंदर से मिलन कामगर अगले दिनफिर वही जुस्तज़ूउषा और निशा को भी हैतड़प बस मिलन कीएक आती भी है तो साथ...
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vikas vashisth
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[16 Sep 2009 09:52 AM]



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