गैर बराबरी की खाई से पैदा होते हैं फूलन जैसे चरित्र
मैं फूलन देवी हूँ भेनचोद.. मैं हूँ।बेंडिट क्वीन फ़िल्म का यह पहला संवाद है, जो दर्शक के कपाल पर भाटे की नुकीली कत्तल की माफिक टकराता है। अगर दर्शक किसी भी तरह के आलस्य के साथ फ़िल्म देखने बैठा है, या बैठा तो स्क्रीन के सामने है और मग़ज़ में और ही कुछ...
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बिज़ूका फ़िल्म क्लब
सत्यनारायण पटेल
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[05 Sep 2009 02:48 AM]



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