मृत्यु

एक बूँद घनघोर अंधेरे मेंखो सी गयी थी कहीं ,बैचेन आँखेथक करसो ही गयीं थी यहीं .राह सूझती ना थी कोई ,सफर का साथी नहीं कोई .अकेले कहाँ तक ले जातीये हमदर्द राहें !!!तभी नज़र आईइककिरण उजाले की ,उसे थाम लेने की देर थी बस....पर,इंतज़ार ,किसी और कोथा मेरा ,मेरे गुजर जाने... [पूरी पोस्ट]
writer pooja

कविता

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[29 Jul 2009 13:41 PM]

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