कुछ खुशियाँ चुराई हैं मैंने
जब तक मुझे विश्वास थाकि तुम्हारी दो आँखें मुझे देख रही हैं ,मैं कहता रहा तुमसेअपना ध्यान रखा करो और खुश रहा करो ,बहुत स्वार्थी था मैं,कभी शुक्रिया ना कह पाया. तुम्हे यह जताता रहा कि मुझे फ़िक्र है तुम्हारीऔर तुम मेरा ध्यान रखती रही .आज जब तुम चली गयीकभी...
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pooja
कविता
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[17 Aug 2009 08:05 AM]



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