नए साल का सूरज

अमिताभ चलिए मै भी मना लेता हूँ,या यूं कहू मान लेता हूँ इस नव वर्ष को| वैसे तो रोज़ ही उगता है अलसाते हुए और किसी मजदूर की तरह दिनभर थक कर चूर शाम होते होते ढह जाता है वो, अब खुमारी में डुबो को कहा दीखता है नए साल का सूरज?... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ श्रीवास्तव
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[31 Dec 2009 08:01 AM]

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