परिवार और संस्कार…
बचपन के सच बचपन की तरह कितने कोमल और सहज होते हैं । कभी चांद को आंगन में उतार लाने की हठ का सच! कभी आंगन में फुदकती गौरैया को पकड़ने की अजानी कोशिश का सच और कभी झाड़ू की सींक से बनाए गुड़िया के स्वेटर बुनने का सच!
याद आती है वो पुराने स्वेटरों की उधड़ी [...]...
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satyanshu
परिवारसंस्कारkatha sansmaran
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[18 Aug 2009 15:39 PM]



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