सपना और सच...

अंतर्द्वंद का आइना मुझे हक हैआगे बढ़ने काकुछ करने का !मन से कहता हूँइच्छा जताता हूँबैठता हूँ करनेकर नहीं पाता हूँ!कोशिश करता हूँसफलता पाने कीअसफलता हाथ लगती है!मन की इच्छापूरी नहीं हो पातीमन में अजीब-सीहरकत होने लगती है!आसन से काम को लेकरचिंता में रहता हूँ!मन में समस्याएं... [पूरी पोस्ट]
writer V. VIVEK

v.vivek

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[26 Sep 2009 07:49 AM]

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