अगर कुछ शेष होगा तो वो होगा हमारा प्रेम..
जीवन के रंगों और सपनों को एक पन्ने में समेटने की गार्गी जी की एक सफल कोशिश......वक्त का पहिया चलता जाता नये - नये ये रूप दिखता हर पल एक सीख दे जाता की हमको है बस चलते जाना बचपन छोड युवा बन जाऊ चाहत थी कोई अपना पाऊ मन में उनका अरमान लिये आंखो में एक सपना...
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नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[18 Aug 2009 17:36 PM]



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