गुमसम तनहा बैठा होगा...

नई क़लम  - उभरते हस्ताक्षर बहुत ही सरल तरीके से सीधे दिल में उतर जाने वाली बात कहने वाले मुखर कवि जतिंदर 'परवाज़' का नई कलम पर आगाज़ देखिये-गुमसम तनहा बैठा होगासिगरट के कश भरता होगाउसने खिड़की खोली होगीऔर गली में देखा होगाज़ोर से मेरा दिल धड़का हैउस ने मुझ को सोचा होगासच बतलाना कैसा... [पूरी पोस्ट]
writer नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[19 Aug 2009 11:23 AM]

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