Dipak 'Mashal' ki 3 rachnayen

नई क़लम  - उभरते हस्ताक्षर 1-क्या खूब पायी थी उसने अदा, ख्वाब तोड़े कई आंधिओं की तरह.कतरे गए कई परिंदों के पर,सबको खेला था वो बाजियों की तरह.हौसला नाम से रब के देता रहा,औ फैसला कर गया काजिओं की तरह. ख़ास बनने के ख्वाब खूब बेंचे मगर,करके छोडा हमें हाशिओं की तरह.साहिलों को मिलाने की... [पूरी पोस्ट]
writer नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[01 Sep 2009 18:23 PM]

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