औरत की क्या हस्ती है?

नई क़लम  - उभरते हस्ताक्षर औरत की क्या हस्ती हैचीज़ वो कितनी सस्ती हैकहीं वो दिल की रानी हैकहीं बस एक कहानी हैकितनी बेबस दिखती हैजब बाज़ार में बिकती हैकहीं वो दुर्गा माता हैइस संसार की दाता हैकहीं वो घर की दासी हैनदिया हो कर प्यासी हैसब के ताने सहती हैफिर भी वो चुप रहती हैसरस्वती... [पूरी पोस्ट]
writer नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[13 Sep 2009 07:10 AM]

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