ग़ज़ल

नई क़लम  - उभरते हस्ताक्षर ज़रा सी देर में दिलकश नजारा डूब जायेगाये सूरज देखना सारे का सारा डूब जायेगानजाने फिर भी क्यों साहिल पे तेरा नाम लिखते हैंहमें मालूम है इक दिन किनारा डूब जायेगासफ़ीना हो के हो पत्थर हैं हम अंजाम से वाक़िफ़तुम्हारा तैर जायेगा हमारा डूब जायेगासमन्दर के सफ़र में... [पूरी पोस्ट]
writer नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[16 Sep 2009 13:25 PM]

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