मुक्तक

नई क़लम  - उभरते हस्ताक्षर वक़्त के बदलाव संग रिश्ते भी बदलने लगे,जहाँ को जाँ दी जिसने उसे 'माल' कहने लगे,इक बन गई दुर्गा तो डरने लग गए उससे,बाकी सबके साथ हरकत फिर वही करने लगे.दीपक 'मशाल'... [पूरी पोस्ट]
writer नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[19 Sep 2009 12:58 PM]

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