इक रिश्ता आसमानी

कुछ लम्हे दिल से... चलो इक रिश्ता आसमानी बना लाएँजिसकी छाँव में ग़मों को हम भुलाएँआगोश में है जिसकी ठंडक चांदनी कीबिखेर रही दोस्ती वही कोमल फिजाएँगर्दिश-ए-दौरां से घायल जज्बातों केग़मों का इजहार तुझ ही से कर पाएँपलकों पे ढलकी अश्कों की बूँदें भीतेरे दिल की सीपी में मोती बन... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
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[30 Aug 2009 08:26 AM]

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