इक तारा गर्दिशों में कहीं खो गया

कुछ लम्हे दिल से... इक तारा गर्दिशों में कहीं खो गयाअपनी ही तन्हाई में तल्लीन सो गयाभटक रहा जुस्तजू की तलाश के लिएघूम रहा कन्धों पे अपनी ही लाश लिएइक शायर बदनाम कहीं हो गयाकश्ती क्या डूबती जो चली ही नहींरिश्ते क्या टूटते जो बने ही नहींअपनी ही कशमकश में ग़मगीन हो गयाइक तारा... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
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[23 Aug 2009 01:34 AM]

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