देखा तेरी आंखों में...

कुछ लम्हे दिल से... देखा तेरी आँखों में अक्स कुछ अपना सागाने लगा मन इक प्यार का नगमा साछू गई मेरे दिल का कोई तार कहींछाया था पलकों पे इकरार का सपना साअनजान थी मैं खुद के हाले दिल से देखा मैंने उनमें इक हमसफ़र अपना साले गई वो मुझको चुराकर मुझ ही सेकर गई महफिल में मुझको तनहा... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
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[31 Aug 2009 13:26 PM]

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