तू अजब वसुंधरा है

कर्मवीर नई नवेली तू अजब वसुंधरा हैतेरे रूप में सौंदर्य बिखरा पड़ा हैमाथे पे सूरज की बिंदिया सजालीगालों पर उषा की लाली लगालीनीला आसमानी आँचल उड़ा हैतेरे रूप में सौंदर्य बिखरा पड़ा हैपंछियों के कलरव सी पायल है बोलीचली कहाँ तू ओ सुन्दर सलोनीघाघरे में धानी रत्नाकर... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
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[18 Aug 2009 11:33 AM]

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