नया सवेरा

कर्मवीर नव वर्ष का नया सवेरा आयासंग अपने नयी खुशियाँ लायासूरज की किरने पड़ीं हर कोनेदिशाओं ने रुपहले चूनर ओढ़ेधरती ने ली गहरी अंगड़ाईहवाओं ने मस्त ख़ुशबू बिखराईनव कोपलों से बलखाती शाखों के तनगुंजित हो उठे पंछियों के कलरव से वनचहक रहा मन महक रहा मननए विहान का जब... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
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[31 Dec 2009 12:52 PM]

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