तुमने बुलाया पास
तुमने बुलाया पास स्तब्ध हृद आकाश घुमड़ घुमड़ घिर गए बह चला हवा का तीव्र झोंका. युग संचित स्वप्न से अकस्मात जाग गया बिखरे रज कणिक से विचारों को वह बहा कर ले गया. मेरे कानों में चुपके से धीरे से कुछ मुस्का कर शर्माता सा बोला, वह यह उदासी किसलिए ? मुझ पर...
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Deepa Pant
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[08 Aug 2009 12:26 PM]



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