स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ
अरुण सुनहरी उषा आई ! अगणित वीरों का त्याग लिए भूतल में तरुण प्रकाश लिए रातों के बंधन पट खोले मंथर गति से लहराई अरुण सुनहरी उषा आई जिसकी पावन किरणों ने सबके मन को बाँध लिया ममता की जंजीरों से वह हमको आज जकड़ने आई अरुण सुनहरी उषा आई यही गुलामी की जंजीरें...
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Deepa Pant
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[15 Aug 2009 05:23 AM]



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