मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए .

मन वृन्दावन मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए नहीं चाहिए मुझको वैभव पर, सुख का संसार चाहिए नित नूतन धाराएं लेकर एक नदी बहती है कितनी बाधाएं टकरातीं पर आगे बढ़तीं हैं नहीं चाहती थम जाना पर, सागर का आधार चाहिए रहूँ वृक्ष से लिपटी सिमटी मैं वह बेल नहीं हूँ खेल सको आजीवन जिससे... [पूरी पोस्ट]
writer Deepa Pant
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[16 Sep 2009 10:11 AM]

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