राजा दुम दबाकर भागा
रोक कार को बोला शेर,खोलो खिड़की करो न देर।जंगल का मैं राजा हूँ,कहते मुझको बब्बर शेर।‘जंगल-दिवस’ आज हमारा,करनी मुझको लंबी सैर।अगर नहीं करवाओगे तो,बच्चू नहीं तुम्हारी खैर।रिंग-मास्टर सर्कस का हूँ,नाम है मेरा ‘सागा’ ।कहा कार वाले ने तो,राजा दुम दबाकर भागा।...
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किरण गुप्ता
कविता
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[20 Aug 2009 22:29 PM]



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