रिश्ते
विश्वास का मौसमज़रूरत की धरती’गर मिलें तोउग ही जाते हैं रिश्ते।लंबा हो मौसमहो ज़रख़ेज़ धरतीतो बढ़ते हैं, फलते हैंखिलखिलाते हैं रिश्ते।बदले जो मौसमबदले जो माटीतो पौधों की भाँतिमर जाते हैं रिश्ते। -0-...
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SHYAM SUNDER AGGARWAL
कविताएँ
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[18 Aug 2009 12:45 PM]



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