..... तब तुम खुद को मरा समझना
सुबह शाम जब प्रणाम न हो जब अभिमान का भान न होबड़ो का जब सम्मान न होसौन्दर्य का जब गुणगान न होज़ुबान हो पर जब कान न हो......... तब खुद को अधमरा समझना.मात-पिता का अपमान सह गयेगुरू को गर अपशब्द कह गयेअनाचार देख नि:शब्द रह गयेकुसंस्कारों के संग गर बह...
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Ekta
कविता
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[02 Aug 2009 10:21 AM]



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