ऐ इन्सानों
आंधी के झूले पर झूलोआग बबूला बन कर फूलोकुरबानी करने को झूमोलाल सबेरे का मूँह चूमोऐ इन्सानों ओस न चाटोअपने हाथों पर्वत काटोपथ की नदियाँ खींच निकालोजीवन पीकर प्यास बुझालोरोटी तुमको राम न देगावेद तुम्हारा काम न देगाजो रोटी का युद्ध करेगावह रोटी को आप वरेगा ।...
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रंगनाथ सिंह
कविता
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[15 Dec 2009 03:38 AM]



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