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दिल्ली की बसों नगर बसों में सफर करना यूं तो अपने आप में एक यातना है, पर इस यातना में एक मजा भी कहीं छिपा हुआ है। यह मजा है कंडेक्टरों की बोली और चुहलबाजी का। कभी-कभी सोचता हूं कि जाने कब नजर पडे़गी ललित कला अकादमी वालों की, इन कलाकारों की कलाकारी पर। हर...
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kaustubh
सफरनामा
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[14 Sep 2009 05:03 AM]



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