दरोगा जी में जाग उठी ’ देवी ’

कोलाहल माथे पर रोली का लंबा सा टीका लगाए आज उनके मुख की शोभा कुछ अलग सी है। रोजाना के रौब के साथ-साथ एक अनूठा तेज टपक रहा है चेहरे से। जिप्सी की अगली सीट पर बैठे एसओ साहब पूरे एक्शन में हैं। अरे, एक्शन मतलब वसूली नहीं यार ! आप लोग तो खामखां एक ही जगह अटक जाते... [पूरी पोस्ट]
writer kaustubh

दिल्ली जिसे कहते हैं

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[25 Sep 2009 04:48 AM]

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