मेरा मन
बारिश में क्यों झूमता है मन, इस मौसम में क्यों तड़पता है मन पानी की बुँदे भी गोलियों सी लगती है,हर बूंदों से आहत होता है मन समुन्दर सा अशांत क्यों होता है मन,झील सा गहरा क्यों होता है मनलहरों के किनारे जब भी आता है,अकेले में बैठ के रोता है मन...
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sweet_dream
कविता
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[20 Aug 2009 16:13 PM]



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