निदा फाज़ली
माननीय,आदरणीय,सम्माननीय,पहलवानी श्री समीर भइया को ये निदा फाज़ली साहब की गजल समर्पित करता हूँ उनकी 20 अगस्त की पोस्ट टैक्सस की यात्रा पे हम हैं कुछ अपने लिए कुछ हैं ज़माने के लिए घर से बाहर की फ़ज़ा हँसने हँसाने के लिए यूँ लुटाते न फिरो मोतियों वाले मौसम...
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निदा फाज़ली
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[26 Aug 2009 14:52 PM]



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