नो.. नो.. नो.. दर्पण दर्शन क्यों ?

कुछ तो है.....जो कि ! * आज सुबह सोकर उठा..वह तो देर सबेर सभी उठते ही हैं, ख़ास बात क्या है ? लेकिन आज मेरा मन कुछ भारी था, अनमना सा बाहर पड़ी कुर्सी पर बैठा शरीफ़े में आते हुये फूलों की कलियाँ गिन रहा था । वह बगल में खड़ी हो जैसे आर्डर ले रही हों, “ ब्लैक टी या नींबू पानी ? ” कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार

चिट्ठचर्चा सँदर्भ

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[09 Sep 2009 19:17 PM]

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