९१ कोजी होम
एक शाम ,मैं किसी काम से गुलज़ार साहब से मिलने उनके बंगले में मिलने गया था .....मेरे पास मोटर साईकिल थी ,जो बड़े बेटे की थी ....मैं अब नहीं चलाता था ...फिर भी उसी से गया था .....वजह थी नई ....अभी कुछ महीने पहले उसने खरीदा था .....होंडा की करिज्मा थी...
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भंगार
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[31 Dec 2009 00:59 AM]



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