खो गया मेरा राह दिखाने वाला
अब नहीं आंखों में ख्वाब है आने वालाचैन से सो रहा है मेरी नींद उडाने वाला मेरी राहों में बिछाए रहता था पलकों कोआज गिरने पर भी न हाथ बढा़ने वाला कल तलक मेरी उंगली पकड़ चलता थामेरे आंगन के बीच दीवार उठाने वाला चाय के पैसे बचा लेता है आफिस मेंकुनबे का बोझ...
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Sonalika
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[25 Jul 2009 01:06 AM]



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