किसी राह में किसी मोड़ पर...
जाने क्यों लगता है,फिर मिल जाओगे मुझेकिसी राह पर किसी मोड़ पर,जाने क्यों अजनबी शहर कीहर एक शय में,बेबस निगाहें ढूंढ़ती हैंतुम्हारी सी कोई पहचान,जाने क्यों डूबते सूरज के साथमेरी लाल ओढ़नी मेंमहकने लगते हैंतुम्हारी पीली डायरी केकुछ सूखे फूल।शहर के...
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Sonalika
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[07 Aug 2009 04:01 AM]



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