अफसुर्दा होती नहीं हूं मैं।
बीज कोई अब नया बोती नहीं हूं मैं,इसलिए अफसुर्दा होती नहीं हूं मैं।मिल न जाए कोई नया सूरज मुझेइस डर से रात भर सोती नहीं हूं मैं।मेरे दर्द उसकी आंखों से छलकते हैं,मां जब सामने हो, रोती नहीं हूं मैंएक दुआ को ओढ़ रखा है सिर पर,मुश्किलों में हौसला खोती नहीं...
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Sonalika
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[09 Aug 2009 05:46 AM]



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