मेरी खामोशियाँ

Tamanna अक्सर मेरी खामोशियाँतुम्हें परेशां करती हैउलझा देती है तुम्हे, मेरी चुपवो भी सोच लेते हो जो मुमकिन ही नही क्यों ?बोलो न, क्यों उलझ जाता है सबकुछतुमने तो दावे किए थे मुझे जानने के, समझने के, महसूस करने केतुम्हें तो हर कहानी का अंत पता होता तुम्हें हर सच... [पूरी पोस्ट]
writer Sonalika
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[31 Dec 2009 06:35 AM]

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