व्यंग्यजल -हमारा बहुमत है

virendra jain ke nashtar हमारा बहुमत हैहम जो चाहे करें, हमारा बहुमत हैदेश समूचा चरें, हमारा बहुमत हैवोट बटारें नैतिकता पर, फिर उसकीमिल कर चटनी करें, हमारा बहुमत हैआलू प्याज सरीखे मत भी बिकते हैंदेकर ऊंची दरें, हमारा बहुमत हैमँहगाई से, दंगों से, हुड़दंगों सेलोग जियें या मरें,... [पूरी पोस्ट]
writer वीरेन्द्र जैन

व्यंग्यजल राजनीति

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[04 Aug 2009 06:37 AM]

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